पेज २६ एंड २७
लेखक की बची ने गुड खाया। गुड खाकर और पानी पीकर वुह सो गयी। लेखक सो न सुका क्योकी उसके धुमाक पर बहूत प्रिशानीय थी। बिस्तर बहूत गंधा था। लेखक को उबकाई उनूभव हो रही थी। वह दिन की उचान्क इन्तिज़ार कर रहा था। "जरा उजाला और हो जाए " उसने बोला। लेखक जाना चाता था लकिन उसके नीचे लोग सो रहे थे और वह उनकी नींद नहीं कोलना चाता था। लेखक ने इन लोगो की बाते सूनी और दर गया था। लेखक ने सोचा कि वह लोग क्रिमिनल्स और अथुन्ग्वाद थे। उसने सोचा कि वे लोग उनको कटने कि कोशश करंगे। ये गलत उसने सोचा। वह लोग थो सिर्फ मुर्गे कटने कि बात कर रहे थे!
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