हमारी हिन्दी कक्षा में हमने इसके बारे में बात की है, अौर इस पर अभी चर्चा चल रही है । मेरे खयाल से इस सवाल को हल करने से पहले हमारे लिये यह जानना ज़रूरी है कि वास्तव में "नैतिक ज़िम्मेदारी" की परिभाषा क्या है ? इसमें कई सवाल हैं जैसे, कौन, किसके लिये, कब, कहाँ तक, कितना, क्यों, क्या, अौर कैसे ? पहले इन प्रश्नों को हल करें तो फिर मुख्य सवाल पर चर्चा की जा सकती है ।
फिल्मों में (खासकर वृत्तचित्रों के लिए) गरीबी का गलत फायदा उठाने का मुद्दा थोरा सा विवादस्पद है. कभी कभी निर्देशक मीरा नायर की जैसी फिल्म में असली गरीबी दिखाना चाहती है. कुछ लोग कहते हैं कि अगर वे गरीब लोगों की प्रयोग करना चाहता तो उनको गरीब लोगों की मदद करना पड़ता, पैसे के माध्यम से. मेरे ख़याल से कलाकारों शोधकर्ताओं और पत्रकारों के नौकरी गरीब लोगों की मदद करती है नहीं. अगर एक कलाकार अभिनेताओं को कष्ट नहीं देता है तो वह कोई गलत नहीं करता है. कलाकारों को ईमानदार और दयालु होना पड़ता है लेकिन इस के अलावा सामाजिक कल्याण समाज की नौकरी है.
कक्षा में हमने फ़िल्म नेर्देशकों से गलत फायदा अगने के बारे में चर्चा केया। शायद कोई लोग सोचएँ कि शोधकर्ते दुसरे लोग का गलत फायदा उठाते हैं। शोधकर्ता अनेक लोग को दर्शन देते हैं। लेकिनअगर वह अपनी किताब से फैसे कमाए तो अमतौरसे वह दर्शन लेते हुए लोग नहीं पैसे देता है। क्या अनुचित है? अगर दर्शन लेते हुए लोग गरीब हैं, तो यह ज़्यादा गलत है? मैं सोचती हूं कि जब शोधकर्ता अपनी किताब पैसे कमाता है तब उसको दर्शन लेते हुए लोग को फायदा देना चाहिए। इससे शोधकरता दुसरे लोग को गरीबी याद करेगा। उसका अनुसंधान दुसरे लोग मदद करेगा और उनके गलत फायदा न उठाएगा।
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हमारी हिन्दी कक्षा में हमने इसके बारे में बात की है, अौर इस पर अभी चर्चा चल रही है । मेरे खयाल से इस सवाल को हल करने से पहले हमारे लिये यह जानना ज़रूरी है कि वास्तव में "नैतिक ज़िम्मेदारी" की परिभाषा क्या है ? इसमें कई सवाल हैं जैसे, कौन, किसके लिये, कब, कहाँ तक, कितना, क्यों, क्या, अौर कैसे ? पहले इन प्रश्नों को हल करें तो फिर मुख्य सवाल पर चर्चा की जा सकती है ।
फिल्मों में (खासकर वृत्तचित्रों के लिए) गरीबी का गलत फायदा उठाने का मुद्दा थोरा सा विवादस्पद है. कभी कभी निर्देशक मीरा नायर की जैसी फिल्म में असली गरीबी दिखाना चाहती है. कुछ लोग कहते हैं कि अगर वे गरीब लोगों की प्रयोग करना चाहता तो उनको गरीब लोगों की मदद करना पड़ता, पैसे के माध्यम से. मेरे ख़याल से कलाकारों शोधकर्ताओं और पत्रकारों के नौकरी गरीब लोगों की मदद करती है नहीं. अगर एक कलाकार अभिनेताओं को कष्ट नहीं देता है तो वह कोई गलत नहीं करता है. कलाकारों को ईमानदार और दयालु होना पड़ता है लेकिन इस के अलावा सामाजिक कल्याण समाज की नौकरी है.
कक्षा में हमने फ़िल्म नेर्देशकों से गलत फायदा अगने के बारे में चर्चा केया। शायद कोई लोग सोचएँ कि शोधकर्ते दुसरे लोग का गलत फायदा उठाते हैं। शोधकर्ता अनेक लोग को दर्शन देते हैं। लेकिनअगर वह अपनी किताब से फैसे कमाए तो अमतौरसे वह दर्शन लेते हुए लोग नहीं पैसे देता है। क्या अनुचित है? अगर दर्शन लेते हुए लोग गरीब हैं, तो यह ज़्यादा गलत है? मैं सोचती हूं कि जब शोधकर्ता अपनी किताब पैसे कमाता है तब उसको दर्शन लेते हुए लोग को फायदा देना चाहिए। इससे शोधकरता दुसरे लोग को गरीबी याद करेगा। उसका अनुसंधान दुसरे लोग मदद करेगा और उनके गलत फायदा न उठाएगा।
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