Thursday, February 10, 2011
रोजा के विचार
अब तक रोजा फिल्म मुझे बहुत पसंद है. फिल्म कश्मीर में शुरू है. एक आतंकवादी पीछे करनेवाले दृश्य के बाद, फिल्म की स्थापना तमिलनाडु बन जाती है. यहाँ गाना के दौरान गाँव जीवन दिकाता है. यह गाना जवानी की बेगुनाही के बारे में है. इस के बाद रोजा बकरियों को चराते चराते एक शहर रहनेवाले को देखती है. वह गाड़ी चलनेवाला, सिगरेट पीनेवाला, और अंग्रेज़ी बोलनेवाला आदमी है और वह रोजा के बड़ी बहन को मिलना चाहता है शादी के लिए. उसको देखकर रोजा घर दौड़ती है. रास्ते में रोजा हर किसीको उसका पहुँच के बारे में कहती है. भीड़ आदमी को पीछी करते करते कुछ सवाल पूछते है. वे उसका काम और वेतन के बारे में जानना चाहते है. एक बुढ़िया सोचती है कि वह कमज़ोर होगा लेकिन तब वह उसको ऊपर उठाकर रोजा का घर चलता है. वे उसको भरोसा नहीं रखता है क्योंकि वे नहीं जानते हैं क्यों शहरवाला आदमी गांववाली लड़की को शादी करना चाहता है. जब रोजा की बड़ी बहन इस आदमी को कहती है कि उसको शादी नहीं करना चाहती है, वह रोजा को शादी करने का फैसला करता है. सब लोग अचरज हैं और वे चिंता करते हैं कि रोजा की बड़ी बहन के लिए शादी में मुसीबत होगा. अंत में असका पिता उसको प्यारी को शादी कर देता है. तो रोजा मद्रास जाती और उसकी बहन गाँव में रहती है.
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संक्षेप
इस फिल्म की शुरुआत में भारतीय सेना कश्मीर में आतंकवादी का पीछे कर रही है. उस के बाद फिल्म दक्षण भारत जाती है, और हम देखते हैं, कि एक पात्र रोजा अपनी गांव में मस्ती कर रही है, और कर्णप्रिय गाना गा रही है. रोजा की बड़ी बहन की शादी तय की जाएगी, और उत्साह से रोजा अपनी बहन के मंगेतर का इंतज़ार कर रही है. जब वह पहुँचता है, रोजा अपनी बहन के पास जाती है, लेकिन वह अपनी बहन की दुखी नहीं ध्यान देती है. रोजा घर से जल्दी दौड़ कर अपनी बहन की शादी के लिए गणेश से मांग करती है. इस बीच रोजा की बहन शहरवालों' को कहती है, की उसकी शादी नहीं कर सकती, क्योंकि वह दूसरे आदमी से प्यार करती. इज्जत से वह उसको नहीं विवश करता, और उसकी शादी करने के बजाय शहरवाला रोजा की शादी करती है. शादी के बाद रोजा उस के साथ चेन्नई जाती है, लेकिन अब तक वह अपने पति को बुरा मानती है.
मुझे बहुत अच्छा लगता है, कि शहरवाला स्त्रियों का आदर करता है--मतलब हालाँकि उस ने रोजा की शादी की, वह उस को भी विवश नहीं करता.
जब फ़िल्म शुरू करती है तब सेना आतंकवाटियों का पीछा करता है जंगल में। लेकिन शीर्षक “खूखार आतंकवाटी पकड़ा था” सिर्फ़ व्याख्या है। इस ही के बाद ग्रामीण (rural) गांव दिखा जाता है। रोजा गांव रही हुई औरत जो उसको खेत और झिल और प्रकृति का बाकी वाली खुश लगती है। हालांकि उसको शहर वाले आदमी के साथ। शादी होनी पड़ती है। अब उसको शहर में रहनी पड़ती है और उसका परिवार छोड़नी पड़ती है।
इस फ़िल्म में मुझे नाच के दृश्य पसंद है। हर गाना बहुत अनुभव दिखाता है। उदहारण के लिए विवाह का रात के बारे में गाना गांव की खुशी दिखाता है। वे लोग विवाह और संबंध की खुशी से मनाते हैं। पर रोजा और उसका पति अजनबी भी है तो वे नहीं मनाते है। एक नाच यह समस्या दिखाता है।
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